Need for Integral Education

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Yuva Bharati - Voice Of Youth
Issue: 
10/2014

Manjul Bhargava became one of the youngest fulltime professors at Princeton University when he was 28. At 40 he is again one of the youngest mathematician to have won the prestigious ‘Fields Medal’ the Nobel equivalent for Mathematics. His work extends the work of classical mathematician Carl Friedrich Gauss. His parents, especially his mother Mira Bhargava, herself a mathematician and grandparents interested him in Sanskrit literature. Bhargava sees his work as a continuation of the legacy of Brahmagupta.

Jesus, Christianity and Swami Vivekananda

Rs.80.00
Jesus, Christianity and Swami Vivekananda
Publication Year: 
June - 2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
192
Volumes: 
1
Language: 
English
Jesus, Christianity and Swami Vivekananda

याचक बनाती शिक्षा

Issue: 
09/2014

सामान्यत: तो गहन आर्थिक विपन्नता से घिरे व्यक्ति को, जो दूसरों के सामने हाथ फैलता है - उसे ही याचक, भिक्षुक या भिखारी कहा जाता है । लेकिन जो दूसरों का हिस्सा हड़पते हैं,शोषण करते हैं, अस्मत लूटते हैं, धोखा देकर उल्लू बनाते हैं, चोरी- चपाटी और भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं, अपनी हित-साधना के लिए किसी भी प्रकार का कुकर्म करते हैं और मानवीयता से शून्य, ऐसे सभी लोग भी कमोबेश याचक की ही श्रेणी में आते हैं ।चरित्र और श्रम शून्यता, व्यक्ति को भिखारी बनाती है । अज्ञान से ग्रसित लोगों में जब स्वार्थ, लोभ, पद-प्रतिष्ठा, अहंकार, वासना आदि की भूख मचलने लगती है, तो वे येन- केन प्रकारेण ऐसे कृत्यों को अंजाम

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