पथदर्शिका

Rs.15.00
पथदर्शिका
पथदर्शिका
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
48
Volumes: 
1

कोई भी व्यक्ति कभी भी बहुत अधिक कार्य नहीं करता है और न ही वह बहुत अधिक दबाव सहन करता है। जब वह कहता है, कि उसके पास कार्याधिक्य है इसका यह आशय नहीं होता कि वह अपनी सुविधा के दायरे को लांघकर, शारीरिक रुप से या अन्यथा, प्रयासरत है। लेकिन, क्या यह सत्य नहीं है कि हर ऐसे व्यक्ति को, जो प्रगति की तीव्र उत्कण्ठा पाले हुए है, या जो निपुणता प्राप्त करना चाहता हे, या कुछ बड़ा करना चाहता है, उसे जानबूझकर सुविधा के दायरे कको लांघते हुए, कार्यधिक्य या तनाव-आधिक्य की आदत का विकास करना होता है और उस प्रक्रिया में दबाव व तनाव को सहने के लिए तत्पर होना पड़ता है। वस्तुत:, इस प्रकार थोड़ा - थोड़ा, अदिक प्रयास

योग एकात्मिक दृष्टि के जीवनपथ का आधार स्तम्भ

Rs.35.00
योग एकात्मिक दृष्टि के जीवनपथ का आधार स्तम्भ
योग एकात्मिक दृष्टि के जीवनपथ का आधार स्तम्भ
Translator: 
Dinanath Phulvadakar
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
64
Volumes: 
1
योग एकात्मिक दृष्टि के जीवनपथ का आधार स्तम्भ
योग एकात्मिक दृष्टि के जीवनपथ का आधार स्तम्भ

आज की आधुनिक पीढ़ी बहुत तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। अभी तक सारी स्थिति अनाकलनीय लग रही है। इसका परिणाम एक ओर तनावग्रस्त जीवन के कारण मनुष्यों के सम्बन्ध में विभाजन की रेखाएँ दुखपूर्ण दे रही हैं। मानसिक तनावग्रस्ता से मनुष्य की प्रगति रुकी हुई है। अत अपने कष्ट का लाभ, सही आनन्द उसे क्वचित मिलता है।

इसलिए योग ही आज अत्याधिक महत्वपूर्ण एवं उपयुक्त है, ऐसा अनुभव हो रहा है । केवल शारीरिक व्यायाम के रुप में सामान्यता: जिसका विपर्यास हुआ है। उस योग के सम्बन्ध में जाग्रति की नितान्त आवश्यकता है।

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